नारी

मैं ही आज हूँ मैं ही कल हूँ

तभी तो मैं एक नारी हूँ

मेरे बिना न इतिहास था

न होगा भविष्य

मेरे बिना कल्पना करना

असम्भव है

मैं ही एक रक्षक हूँ

मैं ही एक माँ हूँ

तभी तो मैं एक नारी हूँ

दर्द मेरे हर कदम में है

मेरा वर्णन हर जन्म में है

मैं ही सहनशीलता की मूरत हूँ

तभी तो मैं एक नारी हूँ

तुम पुरुष एक योद्धा हो तो

ये मत सोचोकी

तुम बहुत बलशाली हो

तुम जैसे महापुरुष को

जन्म देने वाली मैं हूं

मुझसे ही सबमे जान हूँ

मुझसे ही सबका मान है

सम्पूर्ण सृष्टि की रचियता मैं

सर्वगुण सम्पन्न मैं

तभी तो में एक नारी हूँ।

डिज़िटल दुनिया

दुनिया की इस दौड़ में

थोड़ा सा रुकना चाहती हूं

अपनो से बढ़ती दूरियों में

खुद को फिर शामिल करना चाहती हु

डिज़िटल कि इस दुनिया से

खुद को दूर रखना चाहती हूं

हर तीज त्योहार में

खुशियां भरना चाहती हूँ

होली के सात रंगों में

रंगना चाहती हूँ

हर बात फोन या व्हाट्सएप्प पर नही

मिलकर करना चाहती हूँ

मिलकर उन खुशियों को

महसूस करना चाहती हूँ

बहुत थक गई हूँ माँ एक बार फिर

तेरी बाहों में सोना चाहती हूँ।

 

साथ

साथ मिले तो जिंदगी भर उसे

निभाते चलना यारो

सीता की परीक्षा राधा का त्याग

मुश्किल है करना यारो

कुछ गलतियां माफ हो जाती है

कुछ दिल को छू जाती है यारों

बुनियादी में रख दो अगर विश्वास

साथ नही छूटेगा यारों

सच्चाई ऐसा तार है जो कभी टूटा नही

झूठ तो पल में फिशल जाता है यारो

हर जन्म का अटूट बंधन है साथ

इसको टूटने न देना यारो

खुशियां अगर बाटते हो तो

दुखो को भी बाटो यारो

आज महफ़िल में तुम्हारी हम भी है

क्या पता कल महफ़िल में हो ही न यारों

प्यार तो सब इतना करते थे

आज दुश्मनों की आंखों में आंशू है यारों

कहते है मरने के बाद सितारा बन जाता है इंसान

काश की इतना अच्छा होता

सितारों में चेहरे दिखते यारों

अगर आज मिली है ये जिंदगी

तो हँसते हँसते जीलो यारों।

 

अमीरों को गरीब बनते देखा

गरीबों को मैंने सड़कों पर चलते देखा

अमीरों को गाड़ी में घूमते

गरीबों को मैंने झोपड़ में रहते देखा

अमीरों को महलों में घूमते

गरीबों को फुटपाथ पर सोते देखा

अमीरों को होटल में घूमते

गरीबों के अंदर प्यार को देखा

अमीरों को स्वार्थी बनते

गरीबों के घर एक रोटी को

चार भागों में बटते देखा

अमीरों को कुछ परेशान सा देखा

गरीबों को सुकून से रहते

राह तो दोनों की एक थी

परिवार को खुश रखना

असली खुशी मैंने गरीबों के

चेहरे पर दौड़ते देखा

अमीरों के घर खुशियों को रोते

आज मैंने फिर इंशा को

अमीर गरीब बनते देखा।।

 

नजरिया

हार से कदम बाहर निकाला

हज़ारों नज़रे मुझ पर

क्योंकि में बेटी हूँ

लोगों ने कहा दुनिया है मतलबी

कोई नही है अपना सब हैं अजनबी

मन में ये बातें समा सी गयी

एक पत्थर की मूर्ति की तरह थम सी गयी

अकेले जाने की हिम्मत बिल्कुल भी नही

बैसाखी साथ चलने की आदत सी हो गईं

क्या ये बैसाखी मेरा साथ निभाएगी?

या मुझे मेरी मंजिल तक पहुँचाएगी

नही न

पर मैं क्या करूँ माँ

बोली माँ प्यार से

बेटा अपने देखने का नज़रिया तो बदल

सच में यहाँ तो सब अपने हैं

बस आत्म निर्भर रहना जरूरी है

मेरे लिए क्योंकि मैं बेटी हूँ।

 

सिर्फ माँ

खुद न खाकर हमे खिलाती प्यारी माँ

खुद न सो कर रात भर हमको सहलाती माँ

धूप लगे तो खुद ही छाव बन जाती माँ

हाथ पकड़ कर हमको चलना सिखाती माँ

हमारी पहली पाठशाला होती माँ

खुद का मन दबा कर हमारी जरूरत पूरी करती माँ

हमारे खातिर पापा से लड़ जाती माँ

कोई अगर हमको मारे आँचल में छुपाती माँ

बच्चो को कुछ हो जाये तो खुदा से भी लड़ जाती माँ

ऐसा न कर सकता खुदा भी

ऐसा करती है सिर्फ एक माँ।।

मैं

मैं थी एक कटी पतंग

जिसको छूना था गगन

डूब गई थी अंधेरे में

लेकर आया तब कोई

एक आशा की किरण

दिया फिर मुझे सहारा

माना जीवन मिला दोबारा

होठ मुस्करा रहे थे

आंखे हो रहे थे नम

सपने जो चूर चूर हुए

उनको फिर सँजोया है

अब मुझे मिली वो डोर है

जो पहुँचा रही मुझको

उन्नति की ओर को।